मदर डील से भारत-EU टैरिफ बंधनों में बड़ा बदलाव

भारत-EU ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: अमेरिका के टैरिफ को बड़ा जवाब

आज 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग 18 साल की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता Free Trade Agreement (FTA) पर सहमति जताई है। इसे दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी मदर डील कहा है, जो वैश्विक व्यापार में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयन ने नई दिल्ली में शिखर बैठक के दौरान इस समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की। यह डील 27-सदस्यीय EU और भारत के बीच है और वैश्विक GDP का लगभग 25% हिस्सा कवर करती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह डील यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लागू किए गए उच्च टैरिफों के बीच आई है, जिनका भारत और EU दोनों पर असर पड़ा है। मदर डील को अमेरिका के “टैरिफ-फर्स्ट” रुख के एक मजबूत रणनीतिक उत्तर के रूप में देखा जा रहा है।

यह समझौता क्या करता है?

  • भारत और EU के बीच व्यापार में लगभग 96.6% वस्तुओं पर टैरिफ हटाया या कम किया जाएगा, जिससे लाखों डॉलर के शुल्क में कटौती संभव है।

  • भारत EU निर्यातकों पर आयात शुल्क घटाएगा, जैसे कारों पर कटौती और शराब-वाइन पर दरें नीचे लाना। वहीं EU भी भारतीय वस्तुओं जैसे टेक्सटाइल, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान और फार्मा में बेहतर पहुंच देगा।

  • इस डील के लागू होने से दोनों तरफ से बाजार-पहुंच आसान होगी, जिससे निर्यात और निवेश दोनों में मजबूती आएगी

वहीं, कुछ संवेदनशील कृषि उत्पाद और छोटे वाहन अभी भी संरक्षण के दायरे में रहेंगे, ताकि घरेलू उद्योगों को अचानक प्रतिस्पर्धा का बड़ा झटका न लगे।

कैसे ‘टैरिफ कम’ करेगा असर?

पुराने टैरिफ रक्षात्मक माहौल में, कई भारतीय सामानों पर अमेरिका द्वारा ऊँचे टैरिफ लगाए गए थे, खासकर वस्त्र और चमड़ा जैसे श्रम-गहन उत्पादों पर। यह मदर डील भारत को एक बड़ा वैकल्पिक बाजार प्रदान करता है जहाँ वह टैरिफ-मुक्त या कम शुल्क के साथ अपने उत्पाद भेज सकेगा।

इसके अलावा, यह डील EU को भी भारतीय बाजार में अधिक जुड़ने का अवसर देती है, जैसे ऑटोमोबाइल, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं में। यह साझेदारी दो अरब से अधिक उपभोक्ताओं का बाजार बनाती है।

दूसरी ओर, डील का औपचारिक रूप से लागू होना अभी बाकी है। इसे EU संसद, सदस्य देशों और भारत की कैबिनेट की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसके बाद यह कदम 2027 में लागू होने की उम्मीद है।

इसलिए यह डील केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार नीति में एक बड़ा परिवर्तन का संकेत है। इससे भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी, निवेश में वृद्धि होगी और विश्व स्तर पर व्यापारिक भागीदारी को नई दिशा मिलेगी।

Umesh Kumar
Author: Umesh Kumar

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