हरियाणा मे नेताओं की नर्सरी इंडियन नेशनल लोकदल को कहा जाता है। बीजेपी से जिनको बीजेपी टिकट मिल चूका है। और अभी कांग्रेस की लिस्ट आनी बाकी है। पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों मे लगभग से नेता इनेलो की देन है।
इनेलो छोड़कर जेजेपी और भाजपा में आए अनूप धानक को उकलाना से भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया।
कपूर वाल्मीकि ने जजपा को छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली। इससे पहले वे इनेलो में भी रह चुके थे। उन्हें मंत्री बिशम्भर वाल्मीकि का टिकट काटकर बवानीखेड़ा से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया।
शिअद व इनेलो के करीबी रलजीत सिंह अजराना ने भाजपा ज्वाइन की। उन्हें पिहोवा से उम्मीदवार बनाया गया है।
ईनेलो छोड़कर श्याम सिंह राणा भाजपा में शामिल हुए। पार्टी ने कर्ण देव कंबोज का टिकट काटकर उन्हें रादौर से प्रत्याशी बनाया है।
कालांवाली से अकाली दल के पूर्व प्रत्याशी राजिंदर देसूजोधा को भाजपा ज्वाइन करवाई गई। अब उन्हें कालांवाली से भाजपा ने टिकट दिया है ।
2019 को नलवा से इडियन नेशनल लोकदल के विधायक रहे रणबीर गंगवा ने भाजपा ज्वाइन की थी। वे भाजपा से जीतकर डिप्टी स्पीकर बने थे। अब उन्हें नलवा से बदलकर बरवाला से टिकट दिया है।
2019 को लोकदल छोड़कर राज्यसभा सदस्य रामकुमार कश्यप भाजपा में शामिल हुए। उन्हें दोबारा भाजपा ने इंद्री से टिकट दिया है।
2018 को इनेलो छोड़कर जींद के कृष्ण मिड्ढा ने भाजपा ज्वाइन की। इनके पिता डॉ. हरिचंद मिड्ढा दो बार इनेलो से विधायक रहे। अब पार्टी ने इन्हें तीसरी बार मौका दिया है।
इनेलो छोड़कर देवेंद्र चतुर्भुज अत्री ने भाजपा ज्वाइन की। इनके पिता भी इनेलो में रहे। इस बार उन्हें उचाना से मैदान में उतारा गया है।
2018 में इनेलो छोड़कर कप्तान बिरधाना ने भाजपा ज्वाइन की थी। भाजपा ने इन्हें झज्जर से प्रत्याशी बनाया है। 2014 में वे निर्दलीय भी चुनाव लड़ चुके हैं।
कैथल के इनेलो नेता लीलाराम गुर्जर ने भाजपा ज्वाइन की। वे 35 वर्ष तक इनेलो में रहे। अब पार्टी ने दोबारा उन्हें कैथल से टिकट दिया है।
इसराना से उम्मीदवार कृष्णलाल पंवार भी इनेलो से आए थे।
साढ़ौरा से उम्मीदवार बलवंत सिंह पुराने लोकदल से हैं।
बल्लभगढ़ से उम्मीदवार मूलचंद शर्मा भी 2009 तक इनेलो मे थे।
ये वो है जिन्हे बीजेपी ने टिकट दिया है और ये इनेलो से निकले हैं।



